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mahabharat 9.23.59-60h: इसी प्रकार रक्त से लथपथ पांडव सेना भी शेष छह हजार घुड़सवारों के साथ युद्ध से विदा हो गई। उनके सभी वाहन थक चुके थे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  9.23.59-60h 
तथैव पाण्डवानीकं रुधिरेण समुक्षितम्॥ ५९॥
षट्साहस्रैर्हयै: शिष्टैरपायाच्छ्रान्तवाहनम्।
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार रक्त से लथपथ पांडव सेना भी शेष छह हजार घुड़सवारों के साथ युद्ध से विदा हो गई। उनके सभी वाहन थक चुके थे।
 
Similarly, the blood-soaked Pandava army also retired from the battle along with the remaining six thousand horsemen. All their vehicles were tired. 59 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)