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mahabharat 9.23.45: हे भरतश्रेष्ठ! वीर योद्धाओं की भुजाओं से निकली हुई शक्ति शत्रुओं पर इस प्रकार पड़ रही थी मानो आकाश से तारे टूट रहे हों। कौरव और पांडव योद्धाओं ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया था।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  9.23.45 
शूरबाहुविसृष्टानां शक्तीनां भरतर्षभ।
ज्योतिषामिव सम्पातमपश्यन् कुरुपाण्डवा:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वीर योद्धाओं की भुजाओं से निकली हुई शक्ति शत्रुओं पर इस प्रकार पड़ रही थी मानो आकाश से तारे टूट रहे हों। कौरव और पांडव योद्धाओं ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया था।
 
O best of the Bharatas! The energy released from the arms of the valiant warriors fell on the enemies as if stars were falling from the sky. The Kaurava and Pandava warriors had witnessed this firsthand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)