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उपारमन्त ज्याशब्दा: प्रेक्षका रथिनोऽभवन्।
न हि स्वेषां परेषां वा विशेष: प्रत्यदृश्यत॥ ४४॥
अनुवाद
धनुष की टंकार बंद हो गई। सारथी योद्धा दर्शक बनकर तमाशा देखने लगे। उस समय हमारे और शत्रु पक्ष के योद्धाओं के पराक्रम में कोई अंतर नहीं था।
The sound of the bowstring stopped. The charioteer warriors became spectators and began to watch the spectacle. At that time, there was no difference in valour between the warriors of our side and those of the enemy. 44.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥