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mahabharat 9.23.13: वे कुंतीपुत्र राजा युधिष्ठिर की रक्षा के लिए छोटे-छोटे घंटियों के जाल से ढके हुए तथा बेहतरीन घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे रथों पर सवार होकर वहां पहुंचे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.23.13 
रथैरश्ववरैर्युक्तै: किङ्किणीजालसंवृतै:।
आजग्मुरथ रक्षन्त: कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वे कुंतीपुत्र राजा युधिष्ठिर की रक्षा के लिए छोटे-छोटे घंटियों के जाल से ढके हुए तथा बेहतरीन घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे रथों पर सवार होकर वहां पहुंचे।
 
They arrived there in chariots covered with a net of small bells and drawn by the finest horses to protect King Yudhishthira, son of Kunti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)