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mahabharat 9.23.12: कौरवों द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर की ऐसी दशा देखकर शिखण्डी आदि महारथी महान क्रोध में भरकर उसे सहन नहीं कर सके ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.23.12 
ते दृष्ट्वा धर्मराजानं कौरवेयैस्तथा कृतम्।
नामृष्यन्त सुसंरब्धा: शिखण्डिप्रमुखा रथा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कौरवों द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर की ऐसी दशा देखकर शिखण्डी आदि महारथी महान क्रोध में भरकर उसे सहन नहीं कर सके ॥12॥
 
Seeing Dharmaraja Yudhishthira brought to such a state by the Kauravas, charioteers like Shikhandi etc., filled with great anger, could not bear it. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)