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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 21: सात्यकिद्वारा क्षेमधूर्तिका वध, कृतवर्माका युद्ध और उसकी पराजय एवं कौरवसेनाका पलायन
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श्लोक 18
श्लोक
9.21.18
निकृत्तं तद् धनु: श्रेष्ठमपास्य शिनिपुङ्गव:।
अन्यदादत्त वेगेन शैनेय: सशरं धनु:॥ १८॥
अनुवाद
उस टूटे हुए धनुष को फेंककर शिनिवंशी महारथी सात्यकि ने शीघ्रतापूर्वक दूसरा धनुष तथा बाण हाथ में ले लिया।
Throwing away that broken bow, Satyaki, the great warrior of Shini, swiftly took the other bow along with the arrow in his hand. 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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