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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम
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श्लोक 27
श्लोक
9.15.27
माद्रीपुत्रौ च संरब्धौ भीमसेनं च पाण्डवम्।
युधिष्ठिरं च कौरव्य विव्याध दशभि: शरै:॥ २७॥
अनुवाद
कुरुनन्दन! इतना ही नहीं, उसने क्रोध में आकर माद्रीकुमार नकुल, सहदेव, पाण्डु पुत्र भीमसेन तथा युधिष्ठिर को भी दस बाणों से क्षत-विक्षत कर दिया। 27॥
Kurunandan! Not only this, in anger he also mutilated Madrikumar Nakul, Sahadev, Pandu's son Bhimsen and Yudhishthir with ten arrows. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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