श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक d1-d2
 
 
श्लोक  9.13.d1-d2 
(अहं मद्‍भ्रातरश्चैव सात्यकिश्च महारथ:।
पञ्चाला: सृञ्जयाश्चैव न शक्ता: स्म हि मद्रपम्॥
निहनिष्यति चैवाद्य मातुलोऽस्मान् महाबल:।
गोविन्दवचनं सत्यं कथं भवति किं त्विदम्॥ )
 
 
अनुवाद
मैं, मेरा भाई, महारथी सात्यकि, पांचाल और संजय योद्धा मिलकर भी मद्रराज शल्य को पराजित नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह महाबली मामा आज हमारा वध कर देगा। फिर भगवान कृष्ण का यह कथन (कि शल्य मेरे हाथों मारा जाएगा) कैसे सिद्ध होगा?
 
‘I, my brother, Maharathi Satyaki and Panchala and Sanjaya warriors, even together are not able to defeat Madraraj Shalya. It seems that this mighty uncle will kill us today. Then how will this statement of Lord Krishna (that Shalya will be killed by my hands) be proved?’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)