श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.13.44 
न पाण्डवानां नास्माकं तत्र किञ्चिद् व्यदृश्यत।
बाणान्धकारे महति कृते तत्र महाहवे॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में बाणों के प्रहार से ऐसा अन्धकार छा गया कि वहाँ हमारी या पाण्डवों की कोई भी सम्पत्ति दिखाई नहीं दे रही थी ॥ 44॥
 
In that great war, the arrows caused such darkness that nothing of ours or the Pandavas' possessions could be seen there. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)