vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम
»
श्लोक 31
श्लोक
9.13.31
ततो दुर्योधनो राजा दृष्ट्वा शल्यस्य विक्रमम्।
निहतान् पाण्डवान् मेने पञ्चालानथ सृञ्जयान्॥ ३१॥
अनुवाद
उस समय राजा दुर्योधन शल्य का पराक्रम देखकर सोचने लगा कि अब तो पाण्डव, पांचाल और संजय अवश्य ही मारे जायेंगे।
At that time King Duryodhana, seeing the valour of Shalya, began to think that now the Pandavas, the Panchalas and Sanjaya would certainly be killed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×