श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.13.23 
तानापतत एवाशु पञ्चानां वै भुजच्युतान्।
वारयामास समरे शस्त्रसङ्घै: स मद्रराट्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तथापि मद्रराज शल्य ने युद्धस्थल में अपने ही अस्त्रों से पाँचों वीरों के चलाए हुए समस्त अस्त्रों को शीघ्र ही नष्ट कर दिया ॥23॥
 
However, King Shalya of Madra quickly destroyed all the weapons fired by the five heroes with his own weapons in the battlefield. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)