श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.12.15 
तौ गदाभिहतैर्गात्रै: क्षणेन रुधिरोक्षितौ।
प्रेक्षणीयतरावास्तां पुष्पिताविव किंशुकौ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
गदा के प्रहार से दोनों के शरीर पर गहरे घाव हो गए थे। अतः क्षण भर में ही वे दोनों रक्त से लथपथ हो गए। उस समय वे दोनों दो खिले हुए पलाश वृक्षों के समान दर्शनीय लग रहे थे।
 
Both of them had deep wounds on their bodies due to the blows of the mace. Hence both of them were drenched in blood in a moment. At that time, both of them looked like two blooming Palaash trees and looked worth seeing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)