श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 96: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.96.2 
हतो वज्रभृता वृत्रस्त्वया कर्णो धनंजय।
वृत्रकर्णवधं घोरं कथयिष्यन्ति मानवा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! प्राचीन काल में इन्द्र ने वज्र धारण करके वृत्रासुर का वध किया था और आज तुमने कर्ण का वध किया है। वृत्रासुर और कर्ण दोनों के वध की कथा अत्यंत भयावह है। लोग सदैव इसकी चर्चा करते रहेंगे। 2॥
 
‘Dhananjay! In ancient times, Indra wielding the thunderbolt had killed Vritrasura and today you have killed Karna. The story of the killing of both Vritrasura and Karna is very horrifying. People will always keep talking about it. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)