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mahabharat 8.94.54: राजन! युद्ध में अपने शत्रु कर्ण को मारकर देवता, गन्धर्व और मनुष्यों द्वारा पूजित होकर अर्जुन अपने उत्तम तेज से उसी प्रकार शोभायमान होने लगे, जैसे पूर्वकाल में वृत्रासुर को मारकर इन्द्र सुशोभित हुए थे॥54॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  8.94.54 
सदेवगन्धर्वमनुष्यपूजितं
निहत्य कर्णं रिपुमाहवेऽर्जुन:।
रराज राजन् परमेण वर्चसा
यथा पुरा वृत्रवधे शतक्रतु:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
राजन! युद्ध में अपने शत्रु कर्ण को मारकर देवता, गन्धर्व और मनुष्यों द्वारा पूजित होकर अर्जुन अपने उत्तम तेज से उसी प्रकार शोभायमान होने लगे, जैसे पूर्वकाल में वृत्रासुर को मारकर इन्द्र सुशोभित हुए थे॥54॥
 
Rajan! After killing his enemy Karna in battle, worshiped by the gods, Gandharvas and humans, Arjun started shining with his best glory in the same way as Indra had been adorned in earlier times by killing Vritrasura. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)