श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.94.53 
शशिप्रकाशाननमर्जुनो यदा
क्षुरेण कर्णस्य शिरो न्यपातयत्।
तदान्तरिक्षे सहसैव शब्दो
बभूव हाहेति सुरैर्विमुक्त:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन ने अपने फरसे से चन्द्रमा के समान उज्ज्वल मुख वाले कर्ण का सिर काट डाला, तब देवताओं के मुख से निकली हुई हाहाकार की ध्वनि आकाश में गूंज उठी ॥53॥
 
When Arjun cut off Karna's head with a face as bright as the moon with his ax, the sound of a howl emanating from the mouths of the gods echoed in the sky. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)