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mahabharat 8.94.51: वनों सहित पर्वत समूह काँपने लगे, सम्पूर्ण भूत समुदाय व्याकुल हो गया। प्रजानाथ! बृहस्पति ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र को चारों ओर से घेर लिया और चन्द्रमा और सूर्य के समान चमकने लगा। 51॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.94.51 
सकाननाश्चाद्रिचयाश्चकम्पिरे
प्रविव्यथुर्भूतगणाश्च सर्वे।
बृहस्पति: सम्परिवार्य रोहिणीं
बभूव चन्द्रार्कसमो विशाम्पते॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वनों सहित पर्वत समूह काँपने लगे, सम्पूर्ण भूत समुदाय व्याकुल हो गया। प्रजानाथ! बृहस्पति ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र को चारों ओर से घेर लिया और चन्द्रमा और सूर्य के समान चमकने लगा। 51॥
 
The mountain groups along with the forests started trembling, the entire ghost community became distressed. Prajanath! The planet Jupiter surrounded the Rohini constellation from all sides and started shining like the moon and the sun. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)