श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  8.94.49 
हते कर्णे सरितो न प्रसस्रु-
र्जगाम चास्तं सविता दिवाकर:।
ग्रहश्च तिर्यग् ज्वलनार्कवर्ण:
सोमस्य पुत्रोऽभ्युदियाय तिर्यक्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
कर्ण के मारे जाने पर नदियों का प्रवाह रुक गया, सूर्यदेव अस्त हो गए और अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी मंगल तथा सोमपुत्र बुध तिरछे होकर उदय हो गए ॥49॥
 
After Karna was killed, the flow of rivers stopped, the Sun God went to set and Mars, who was as bright as Agni and the Sun, and Mercury, the son of Soma, rose obliquely. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)