Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.94.46-47: वह महाहृदयी कर्ण जिसका सम्पूर्ण धन ब्राह्मणों के अधीन था, जो ब्राह्मणों को कभी कुछ भी, यहाँ तक कि अपना प्राण भी नहीं देता था, जो सदैव स्त्रियों से प्रेम करता था और प्रतिदिन दान देता था, वह महारथी कर्ण पार्थ के बाणों से भस्म होकर परम मोक्ष को प्राप्त हुआ ॥46-47॥ | mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह महाहृदयी कर्ण जिसका सम्पूर्ण धन ब्राह्मणों के अधीन था, जो ब्राह्मणों को कभी कुछ भी, यहाँ तक कि अपना प्राण भी नहीं देता था, जो सदैव स्त्रियों से प्रेम करता था और प्रतिदिन दान देता था, वह महारथी कर्ण पार्थ के बाणों से भस्म होकर परम मोक्ष को प्राप्त हुआ ॥46-47॥
That great-hearted Karna whose entire wealth was under the control of the Brahmins, who never gave anything, not even his life, to the Brahmins, who always loved women and gave alms daily, that great warrior Karna was burnt by the arrows of Partha and attained the ultimate salvation. ॥46-47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥