श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.94.34 
तप्तजाम्बूनदनिभं ज्वलनार्कसमप्रभम्।
जीवन्तमिव तं शूरं सर्वभूतानि मेनिरे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह तपाये हुए सोने, अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी था। उस वीर पुरुष को देखकर समस्त प्राणी मानो जीवित हो उठे ॥34॥
 
He was as radiant as heated gold, fire and the sun. Seeing that brave man, all the living beings felt as if they were alive. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)