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mahabharat 8.94.28: महाराज! कर्ण के मारे जाने पर सभी कौरव अत्यन्त दुःखी हुए और 'हे कर्ण! हे कर्ण!' का जाप करने लगे तथा लाल सूर्य की ओर देखते हुए बड़े वेग से शिविर की ओर चले।   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.94.28 
वधेन कर्णस्य तु दु:खितास्ते
हा कर्ण हा कर्ण इति ब्रुवाणा:।
द्रुतं प्रयाता: शिबिराणि राजन्
दिवाकरं रक्तमवेक्षमाणा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! कर्ण के मारे जाने पर सभी कौरव अत्यन्त दुःखी हुए और 'हे कर्ण! हे कर्ण!' का जाप करने लगे तथा लाल सूर्य की ओर देखते हुए बड़े वेग से शिविर की ओर चले।
 
Maharaj! All the Kauravas were very sad on the killing of Karna and started chanting 'Oh Karna! Oh Karna!' and looking towards the red Sun, they moved towards the camp with great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)