Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.94.26: भूमि मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के रक्त से इतनी भीग गई थी कि वह लाल वस्त्र, लाल फूलों की माला और तपे हुए सोने के आभूषण पहने हुए वेश्या के समान दिखाई दे रही थी॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  8.94.26 
नराश्वमातङ्गशरीरजेन
रक्तेन सिक्तां च तथैव भूमिम्।
रक्ताम्बरस्रक् तपनीययोगा-
न्नारीं प्रकाशामिव सर्वगम्याम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भूमि मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के रक्त से इतनी भीग गई थी कि वह लाल वस्त्र, लाल फूलों की माला और तपे हुए सोने के आभूषण पहने हुए वेश्या के समान दिखाई दे रही थी॥ 26॥
 
The ground was soaked in the blood of men, horses and elephants, so much so that she appeared like a prostitute, dressed in red clothes, garland of red flowers and ornaments made of heated gold.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)