श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.94.24 
इत्येवमुक्त्वा विरराम शल्यो
दुर्योधनं शोकपरीतचेता:।
हा कर्ण हा कर्ण इति ब्रुवाण-
मार्तं विसंज्ञं भृशमश्रुनेत्रम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन से ऐसा कहकर राजा शल्य मौन हो गए। उनका मन शोक से व्याकुल हो रहा था। दुर्योधन भी व्याकुल होकर 'हे कर्ण! हे कर्ण!' चिल्लाने लगा। वह अपनी सुध-बुध खो बैठा था। उसके नेत्रों से अविरल आँसुओं की धारा बह रही थी॥ 24॥
 
Having said this to Duryodhan, King Shalya became silent. His mind was getting restless with grief. Duryodhan also became distressed and started crying out 'Oh Karna! Oh Karna!' He had lost his senses. A continuous stream of tears was flowing from his eyes.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)