Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.94.17: सोने के पत्तों से बनी हुई कुल्हाड़ियाँ, फरसे, तीखे भाले, मूसल, हथौड़े, म्यान से निकाली हुई चमकती हुई तलवारें और सोने से जड़ी हुई गदाएँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 8.94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.94.17 
सहेमपट्टा: परिघा: परश्वधा:
शिताश्च शूला मुसलानि मुद्‍गरा:।
पेतुश्च खड्गा विमला विकोशा
गदाश्च जाम्बूनदपट्टनद्धा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सोने के पत्तों से बनी हुई कुल्हाड़ियाँ, फरसे, तीखे भाले, मूसल, हथौड़े, म्यान से निकाली हुई चमकती हुई तलवारें और सोने से जड़ी हुई गदाएँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं॥ 17॥
 
Gold-leafed axes, axes, sharp spears, pestles, hammers, gleaming swords drawn out of their sheaths and gold-studded maces are lying scattered here and there.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)