श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 94: शल्यके द्वारा रणभूमिका दिग्दर्शन, कौरव-सेनाका पलायन और श्रीकृष्ण तथा अर्जुनका शिविरकी ओर गमन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.94.12 
शरास्तु कर्णार्जुनबाहुमुक्ता
विदार्य नागाश्वमनुष्यदेहान्।
प्राणान् निरस्याशु महीं प्रतीयु-
र्महोरगा वासमिवातिताम्रा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कर्ण और अर्जुन के छोड़े हुए बाण हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों के शरीरों को छेदते हुए उनके प्राण निकाल लेते थे और तुरंत ही पृथ्वी में समा जाते थे, मानो बड़े-बड़े लाल सर्प अपने बिलों में घुस गए हों।
 
The arrows shot by Karna and Arjun pierced the bodies of elephants, horses and men, took out their lives and immediately entered the earth, as if huge red serpents had gone into their holes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)