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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 92: कौरवोंका शोक, भीम आदि पाण्डवोंका हर्ष, कौरव-सेनाका पलायन और दु:खित शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.92.4 
प्रहृष्टवित्रस्तविषण्णविस्मिता-
स्तथा परे शोकहता इवाभवन्।
परे त्वदीयाश्च परस्परेण
यथायथैषां प्रकृतिस्तथाभवन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुछ खुश थे, कुछ डरे हुए थे। कुछ उदास थे, कुछ हैरान थे और कई तो शोक से मर रहे थे। आपके और दुश्मन के सैनिक भी स्वभावतः उन्हीं भावनाओं में डूबे हुए थे।
 
Some were happy, some were afraid. Some were sad, some were surprised and many others were dying of grief. Your and the enemy's soldiers were immersed in the same emotions as their nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)