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श्लोक 8.91.27  |
ववौ सशर्करो वायुर्दिशश्च रजसा वृता:।
हाहाकारश्च संजज्ञे सुराणां दिवि भारत॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| भारत! भयंकर वायु चलने लगी, कंकर बरसने लगे। सब ओर धूल फैल गई और स्वर्ग के देवता भी त्राहि-त्राहि करने लगे॥ 27॥ |
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| Bharat! A fierce wind started blowing, raining pebbles. Dust spread in all directions and even the gods in heaven were in an uproar.॥ 27॥ |
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