श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुन और कर्णका घोर युद्ध, भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा कर्णका अपना पहिया पृथ्वीमें फँस जानेपर अर्जुनसे बाण न चलानेके लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  8.90.17-18 
ततस्तौ पुरुषव्याघ्रौ सर्वलोकधनुर्धरौ।
त्यक्तप्राणौ रणे वीरौ युद्धश्रममुपागतौ।
समुत्क्षेपैर्वीज्यमानौ सिक्तौ चन्दनवारिणा॥ १७॥
सवालव्यजनैर्दिव्यैर्दिविस्थैरप्सरोगणै:।
शक्रसूर्यकराब्जाभ्यां प्रमार्जितमुखावुभौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, कर्ण और अर्जुन जैसे विश्वविख्यात धनुर्धर, वीर पुरुष प्राणों का मोह त्यागकर युद्ध करते-करते थक गए। उस समय आकाश में खड़ी अप्सराओं ने अपने दिव्य पंख फड़फड़ाए और उन पर चंदन का जल छिड़का। तब इंद्र और सूर्य ने अपने करकमलों से उनके मुख पोंछे।
 
Thereafter, the world's renowned archers, brave men like Karna and Arjuna, gave up their love for life and got tired of fighting. At that time, the Apsaras standing in the sky waved their divine fans and sprinkled sandalwood water on them. Then Indra and Surya wiped their faces with their lotus hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)