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mahabharat 8.9.29-31h: सुत! जैसे बच्चे खेलते समय किसी पक्षी को पकड़कर उसके पंख काट लेते हैं और फिर खुशी-खुशी उसे छोड़ देते हैं। फिर पंख कट जाने के कारण वह कहीं उड़ नहीं पाता। उस कटे हुए पंख वाले पक्षी की तरह मैं भी बहुत बुरी स्थिति में पड़ गया हूँ। 29-30 1/2।   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 29-31h
 
 
श्लोक  8.9.29-31h 
यथा हि शकुनिं गृह्य छित्त्वा पक्षौ च संजय॥ २९॥
विसर्जयन्ति संहृष्टा: क्रीडमाना: कुमारका:।
लूनपक्षतया तस्य गमनं नोपपद्यते॥ ३०॥
तथाहमपि सम्प्राप्तो लूनपक्ष इव द्विज:।
 
 
अनुवाद
सुत! जैसे बच्चे खेलते समय किसी पक्षी को पकड़कर उसके पंख काट लेते हैं और फिर खुशी-खुशी उसे छोड़ देते हैं। फिर पंख कट जाने के कारण वह कहीं उड़ नहीं पाता। उस कटे हुए पंख वाले पक्षी की तरह मैं भी बहुत बुरी स्थिति में पड़ गया हूँ। 29-30 1/2।
 
Sut! Just as children while playing catch a bird and cut off its wings and then happily let it go. Then because its wings are cut off, it is not possible for it to fly anywhere. Like that bird with cut wings, I too have fallen into a very bad situation. 29-30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)