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mahabharat 8.9.21-23h: सूत! क्या मेरा पुत्र दु:शासन कायर, असहाय और निर्बल की भाँति भागते हुए मारा गया? हे प्रिय! उसने युद्धभूमि में दयनीय आचरण नहीं किया। क्या वह वीर दु:शासन अन्य श्रेष्ठ क्षत्रियों के समान ही नहीं मारा गया?॥ 21-22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 21-23h
 
 
श्लोक  8.9.21-23h 
पलायमान: कृपणो दीनात्मा दीनपौरुष:॥ २१॥
कच्चिद् विनिहत: सूत पुत्रो दु:शासनो मम।
कच्चिन्न दीनाचरितं कृतवांस्तात संयुगे॥ २२॥
कच्चिन्न निहत: शूरो यथान्ये क्षत्रियर्षभा:।
 
 
अनुवाद
सूत! क्या मेरा पुत्र दु:शासन कायर, असहाय और निर्बल की भाँति भागते हुए मारा गया? हे प्रिय! उसने युद्धभूमि में दयनीय आचरण नहीं किया। क्या वह वीर दु:शासन अन्य श्रेष्ठ क्षत्रियों के समान ही नहीं मारा गया?॥ 21-22 1/2॥
 
Suta! Was my son Dushasan killed while fleeing like a coward, helpless and bereft of courage? O dear! He did not behave pitifully on the battlefield. Was the valiant Dushasan not killed in the same manner as other great Kshatriyas?॥ 21-22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)