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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 9: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  8.9.20-21h 
अन्यथा चिन्तितं कार्यमन्यथा तत् तु जायते॥ २०॥
अहो नु बलवद् दैवं कालश्च दुरतिक्रम:।
 
 
अनुवाद
कोई कुछ अलग करने की सोचता है, लेकिन नियति के कारण वह कुछ और ही हो जाता है। अरे! सचमुच, नियति बलवान है और समय अटल है।
 
One may think of doing something in a different way, but due to destiny it turns out to be something else. Oh! Indeed destiny is powerful and time is inexorable.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)