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mahabharat 8.89.d1: उस समय वे दोनों महारथी योद्धा दो विषैले सर्पों के समान लम्बी-लम्बी साँसें छोड़ते हुए धूमरहित अग्नि के समान अपना द्वेष प्रकट कर रहे थे। वे युद्धभूमि में घी की आहुति से प्रज्वलित दो अग्नियों के समान चमकने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  8.89.d1 
(आशीविषावग्निमिवापधूमं
वैरं मुखाभ्यामभिनि:श्वसन्तौ।
यशस्विनौ जज्वलतुर्मृधे तदा
घृतावसिक्ताविव हव्यवाहौ॥ )
 
 
अनुवाद
उस समय वे दोनों महारथी योद्धा दो विषैले सर्पों के समान लम्बी-लम्बी साँसें छोड़ते हुए धूमरहित अग्नि के समान अपना द्वेष प्रकट कर रहे थे। वे युद्धभूमि में घी की आहुति से प्रज्वलित दो अग्नियों के समान चमकने लगे।
 
At that time, both those famous warriors were breathing out their long breaths like two poisonous snakes and were expressing their hatred like smokeless fire. They started shining in the battlefield like two fires lit by the offering of ghee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)