Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.89.90: वे बाण नहीं, बल्कि तक्षक पुत्र अश्वसेन को सहारा दे रहे पाँच विशाल सर्प थे। अर्जुन ने सावधानी से दस भाले चलाकर उनमें से प्रत्येक को तीन टुकड़ों में तोड़ दिया। अर्जुन के बाणों से घायल होकर वे सभी सर्प धरती पर गिर पड़े। | mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे बाण नहीं, बल्कि तक्षक पुत्र अश्वसेन को सहारा दे रहे पाँच विशाल सर्प थे। अर्जुन ने सावधानी से दस भाले चलाकर उनमें से प्रत्येक को तीन टुकड़ों में तोड़ दिया। अर्जुन के बाणों से घायल होकर वे सभी सर्प धरती पर गिर पड़े।
Those were not arrows but five huge serpents supporting Takshaka's son Ashwsen. Arjuna carefully shot ten lances and broke each of them into three pieces. They fell to the ground after being struck by Arjuna's arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥