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श्लोक 8.89.86-87  |
स पार्थबाणासनवेगमुक्तै-
र्दृढाहत: पत्रिभिरुग्रवेगै:॥ ८६॥
विभिन्नगात्र: क्षतजोक्षिताङ्ग:
कर्णो बभौ रुद्र इवाततेषु:।
प्रक्रीडमानोऽथ श्मशानमध्ये
रौद्रे मुहूर्ते रुधिरार्द्रगात्र:॥ ८७॥ |
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| अनुवाद |
| अर्जुन के धनुष से छूटे हुए भयंकर बाणों से कर्ण का सम्पूर्ण शरीर छिन्न-भिन्न हो गया। वह रक्त से नहा गया और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो महाप्रलय के समय श्मशान में क्रीड़ा कर रहे भगवान रुद्र हों। उसका शरीर बाणों से आच्छादित तथा रक्त से लथपथ था। |
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| Karna's entire body was torn apart by the fierce arrows shot from Arjuna's bow. He was bathed in blood and appeared like Lord Rudra, playing in the cremation ground at a fierce moment, with his body covered with arrows and soaked in blood. 86-87. |
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