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श्लोक 8.89.80-81h  |
पुनश्च पाञ्चालवरास्तथान्ये
तदन्तरे कर्णधनंजयाभ्याम्॥ ८०॥
प्रस्कन्दन्तो बलिना साधुमुक्तै:
कर्णेन बाणैर्निहता: प्रसह्य। |
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| अनुवाद |
| पांचालों के प्रधान योद्धा तथा अन्य योद्धा पुनः कर्ण और अर्जुन के बीच आ गये; किन्तु बलवान कर्ण ने अपने अचूक बाणों से उन सबको मार डाला। |
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| The chief soldiers of the Panchalas and other warriors once again came between Karna and Arjuna; but the powerful Karna stubbornly killed them all with his well-shot arrows. 80 1/2 |
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