श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  8.89.77-78h 
प्राच्छादयंस्ते विशिखै: पृषत्कै-
र्जीमूतसंघा नभसीव सूर्यम्॥ ७७॥
आगच्छतस्तान् विशिखैरनेकै-
र्व्यष्टम्भयत् सूतपुत्र: कृतास्त्र:।
 
 
अनुवाद
फिर जैसे आकाश में बादल सूर्य को ढक लेता है, उसी प्रकार सोमकों ने अपने बाणों से कर्ण को ढक लिया; किन्तु वह महारथी अस्त्रविद्या का महान् विद्वान था; उसने अनेक बाणों से प्रहार करके सोमकों को जहाँ कहीं भी थे, वहीं रोक दिया।
 
Then just as a cloud covers the Sun in the sky, so the Somakas covered Karna with their arrows; but the son of a charioteer was a great scholar of the art of weapons; and he stopped the Somakas wherever they were, attacking him with many arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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