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श्लोक 8.89.77-78h  |
प्राच्छादयंस्ते विशिखै: पृषत्कै-
र्जीमूतसंघा नभसीव सूर्यम्॥ ७७॥
आगच्छतस्तान् विशिखैरनेकै-
र्व्यष्टम्भयत् सूतपुत्र: कृतास्त्र:। |
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| अनुवाद |
| फिर जैसे आकाश में बादल सूर्य को ढक लेता है, उसी प्रकार सोमकों ने अपने बाणों से कर्ण को ढक लिया; किन्तु वह महारथी अस्त्रविद्या का महान् विद्वान था; उसने अनेक बाणों से प्रहार करके सोमकों को जहाँ कहीं भी थे, वहीं रोक दिया। |
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| Then just as a cloud covers the Sun in the sky, so the Somakas covered Karna with their arrows; but the son of a charioteer was a great scholar of the art of weapons; and he stopped the Somakas wherever they were, attacking him with many arrows. |
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