Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.89.48-49: भीमसेन और श्रीकृष्ण के इस प्रकार कहने पर महाबली अर्जुन ने सारथिपुत्र को मारने का विचार किया। उन्होंने अपने स्वरूप का स्मरण करके सब ओर देखा और इस युद्धभूमि में उनके आगमन का प्रयोजन समझकर श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा -॥48-49॥ | mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एवमुक्तोऽतिबलो महात्मा
चकार बुद्धिं हि वधाय सौते:॥ ४८॥
स चोदितो भीमजनार्दनाभ्यां
स्मृत्वा तथाऽऽत्मानमवेक्ष्य सर्वम्।
इहात्मनश्चागमने विदित्वा
प्रयोजनं केशवमित्युवाच॥ ४९॥
अनुवाद
भीमसेन और श्रीकृष्ण के इस प्रकार कहने पर महाबली अर्जुन ने सारथिपुत्र को मारने का विचार किया। उन्होंने अपने स्वरूप का स्मरण करके सब ओर देखा और इस युद्धभूमि में उनके आगमन का प्रयोजन समझकर श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा -॥48-49॥
On being inspired and told by Bhimasena and Shri Krishna in this manner, the very powerful and great Arjun thought of killing the son of a charioteer. He remembered his own form and looked at everything and after understanding the purpose of his arrival in this battlefield, he said to Shri Krishna in this manner -॥ 48-49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥