Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.89.41-42h: हे पार्थ! तुम उसकी उपेक्षा क्यों कर रहे हो? आज उसकी उपेक्षा करने का समय नहीं है। जिस धैर्य से तुमने खांडव वन में अग्निदेव को भोग लगाकर समस्त प्राणियों पर विजय प्राप्त की थी, उसी धैर्य से तुम इस सारथीपुत्र का वध करो। फिर मैं भी उसे अपनी गदा से कुचल दूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 8.89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 89: कर्ण और अर्जुनका भयंकर युद्ध और कौरववीरोंका पलायन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  8.89.41-42h 
कस्मादुपेक्षां कुरुषे किरीटि-
न्नुपेक्षितुं नायमिहाद्य काल:।
यया धृत्या सर्वभूतान्यजैषी-
र्ग्रासं ददत् खाण्डवे पावकाय॥ ४१॥
तया धृत्या सूतपुत्रं जहि त्व-
महं चैनं गदया पोथयिष्ये।
 
 
अनुवाद
हे पार्थ! तुम उसकी उपेक्षा क्यों कर रहे हो? आज उसकी उपेक्षा करने का समय नहीं है। जिस धैर्य से तुमने खांडव वन में अग्निदेव को भोग लगाकर समस्त प्राणियों पर विजय प्राप्त की थी, उसी धैर्य से तुम इस सारथीपुत्र का वध करो। फिर मैं भी उसे अपनी गदा से कुचल दूँगा।'
 
Crowned Partha! Why are you ignoring him? Today is not the time to ignore him. With the same patience with which you conquered all creatures in Khandava forest by offering food to Agnidev, kill the son of a charioteer. Then I will also crush him with my mace.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)