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mahabharat 8.88.5-6h: जैसे पूर्वकाल में देवताओं ने दैत्यों के साथ युद्ध किया था, उसी प्रकार पाण्डवों का कौरवों के साथ युद्ध हुआ। जब अर्जुन और कर्ण के बाणों से वह घोर एवं प्रचण्ड युद्ध आरम्भ हुआ, तब दोनों कवचधारी योद्धा अपने तीखे बाणों से समस्त दिशाओं और सेनाओं को आच्छादित करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  8.88.5-6h 
बभूव युद्धं कुरुपाण्डवानां
यथा सुराणामसुरै: सहाभवत्।
तथा प्रवृत्ते तुमुले सुदारुणे
धनंजयस्याधिरथेश्च सायकै:॥ ५॥
दिशश्च सैन्यं च शितैरजिह्मगै:
परस्परं प्रावृणुतां सुदंशितौ।
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में देवताओं ने दैत्यों के साथ युद्ध किया था, उसी प्रकार पाण्डवों का कौरवों के साथ युद्ध हुआ। जब अर्जुन और कर्ण के बाणों से वह घोर एवं प्रचण्ड युद्ध आरम्भ हुआ, तब दोनों कवचधारी योद्धा अपने तीखे बाणों से समस्त दिशाओं और सेनाओं को आच्छादित करने लगे।
 
Just as in the past, the gods had fought with the demons, similarly the Pandavas had a war with the Kauravas. When that fierce and furious battle began with the arrows of Arjuna and Karna, both the armored warriors started covering all directions and armies with their sharp arrows. 5 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)