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mahabharat 8.88.23-24: युधिष्ठिर सदैव समस्त प्राणियों के कल्याण में लगे रहते हैं। अतः वे भी मेरी बात मानेंगे। भीमसेन और नकुल-सहदेव भी धर्मराज के अधीन हैं; (अतः उनकी इच्छा के विरुद्ध वे कोई कार्य नहीं करेंगे)। इस प्रकार पाण्डवों के साथ आपकी संधि हो जाने पर समस्त प्रजा का कल्याण होगा। तब आपकी इच्छानुसार आपके स्वजन अपने-अपने नगरों को लौट जाएँगे और सभी सैनिक युद्ध से निवृत्त हो जाएँगे। हे राजे! यदि आप मेरी बात नहीं मानेंगे, तो युद्ध में शत्रुओं द्वारा अवश्य ही मारे जाएँगे और उस समय आपको बड़ा पश्चाताप होगा।'   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  8.88.23-24 
युधिष्ठिरो भूतहिते रत: सदा
वृकोदरस्तद्वशगस्तथा यमौ।
त्वया तु पाथैर्श्च कृते च संविदे
प्रजा: शिवं प्राप्नुयुरिच्छया तव॥ २३॥
व्रजन्तु शेषा: स्वपुराणि बान्धवा
निवृत्तयुद्धाश्च भवन्तु सैनिका:।
न चेद् वच: श्रोष्यसि मे नराधिप
ध्रुवं प्रतप्तासि हतोऽरिभिर्युधि॥ २४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर सदैव समस्त प्राणियों के कल्याण में लगे रहते हैं। अतः वे भी मेरी बात मानेंगे। भीमसेन और नकुल-सहदेव भी धर्मराज के अधीन हैं; (अतः उनकी इच्छा के विरुद्ध वे कोई कार्य नहीं करेंगे)। इस प्रकार पाण्डवों के साथ आपकी संधि हो जाने पर समस्त प्रजा का कल्याण होगा। तब आपकी इच्छानुसार आपके स्वजन अपने-अपने नगरों को लौट जाएँगे और सभी सैनिक युद्ध से निवृत्त हो जाएँगे। हे राजे! यदि आप मेरी बात नहीं मानेंगे, तो युद्ध में शत्रुओं द्वारा अवश्य ही मारे जाएँगे और उस समय आपको बड़ा पश्चाताप होगा।'
 
‘Yudhishthira is always engaged in the welfare of all living beings. Hence, he will also agree to what I say. As for Bhimsen and Nakul-Sahadeva, they are also under the control of Dharmaraj; (therefore, they will not do anything against their wishes). In this way, after your treaty with the Pandavas, all the people will be benefited. Then, as per your wish, your relatives will return to their respective cities and all the soldiers will be relieved from the war. O Lord of kings! If you do not listen to me, then you will definitely be killed by the enemies in the war and at that time you will feel great remorse. 23-24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)