Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.88.20-21: तत्पश्चात् द्रोणकुमार अश्वत्थामा ने दुर्योधन का हाथ अपने हाथ से दबाकर उसे सान्त्वना दी और कहा - 'दुर्योधन! अब प्रसन्न हो जाओ। पाण्डवों से संधि कर लो। विरोध करने से कोई लाभ नहीं है। तुम्हारे इस झगड़े को धिक्कार है! तुम्हारे गुरुदेव शस्त्रविद्या के महान् विद्वान थे। ब्रह्माजी के समान होते हुए भी वे इस युद्ध में मारे गए। भीष्म आदि महारथियों की भी यही दशा है। 20-21॥ | mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् द्रोणकुमार अश्वत्थामा ने दुर्योधन का हाथ अपने हाथ से दबाकर उसे सान्त्वना दी और कहा - 'दुर्योधन! अब प्रसन्न हो जाओ। पाण्डवों से संधि कर लो। विरोध करने से कोई लाभ नहीं है। तुम्हारे इस झगड़े को धिक्कार है! तुम्हारे गुरुदेव शस्त्रविद्या के महान् विद्वान थे। ब्रह्माजी के समान होते हुए भी वे इस युद्ध में मारे गए। भीष्म आदि महारथियों की भी यही दशा है। 20-21॥
Thereafter, Drona Kumar Ashwatthama pressed Duryodhana's hand with his hand and consoled him and said - 'Duryodhana! Be happy now. Make a treaty with the Pandavas. There is no benefit in protesting. Curse this quarrel of yours! Your Gurudev was a great scholar of weaponry. Even though he was like Lord Brahma, he was killed in this war. This is the condition of great charioteers like Bhishma also. 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥