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mahabharat 8.88.19-20h: देवताओं और मनुष्यों के समक्ष हुए उस अद्भुत युद्ध को देखकर समस्त प्राणी आश्चर्य से चकित हो गए; परंतु आपके पुत्र दुर्योधन और सारथिपुत्र कर्ण - दोनों ही निश्चय पर पहुँच चुके थे; इसलिए उनके हृदय में न तो कोई पीड़ा हुई और न ही उन्हें कोई आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  8.88.19-20h 
तदद्भुतं देवमनुष्यसाक्षिकं
समीक्ष्य भूतानि विसिस्मियुस्तदा॥ १९॥
तवात्मज: सूतसुतश्च न व्यथां
न विस्मयं जग्मतुरेकनिश्चयौ।
 
 
अनुवाद
देवताओं और मनुष्यों के समक्ष हुए उस अद्भुत युद्ध को देखकर समस्त प्राणी आश्चर्य से चकित हो गए; परंतु आपके पुत्र दुर्योधन और सारथिपुत्र कर्ण - दोनों ही निश्चय पर पहुँच चुके थे; इसलिए उनके हृदय में न तो कोई पीड़ा हुई और न ही उन्हें कोई आश्चर्य हुआ।
 
Seeing that wonderful war being fought in the presence of gods and men, all beings were astonished with wonder; but your son Duryodhan and charioteer's son Karna - both had reached a decision; therefore, there was neither pain in their hearts nor were they surprised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)