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mahabharat 8.88.15-16h: यह देखकर अर्जुन ने उनके धनुष, तरकस, ध्वजा, घोड़े, रथ और सारथि - सभी को अपने बाणों से घायल कर दिया और उनके चारों ओर खड़े समस्त शत्रुओं को शीघ्रता से क्षत-विक्षत कर दिया। उसने सारथिपुत्र कर्ण पर भी बारह बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  8.88.15-16h 
धनूंषि तेषामिषुधीन् ध्वजान् हयान्
रथांश्च सूतांश्च धनंजय: शरै:॥ १५॥
समं प्रमथ्याशु परान् समन्तत:
शरोत्तमैर्द्वादशभिश्च सूतजम्।
 
 
अनुवाद
यह देखकर अर्जुन ने उनके धनुष, तरकस, ध्वजा, घोड़े, रथ और सारथि - सभी को अपने बाणों से घायल कर दिया और उनके चारों ओर खड़े समस्त शत्रुओं को शीघ्रता से क्षत-विक्षत कर दिया। उसने सारथिपुत्र कर्ण पर भी बारह बाणों से आक्रमण किया।
 
Seeing this, Arjuna struck their bows, quivers, flags, horses, chariots and charioteers - all of them - with his arrows and quickly pierced all the enemies standing around them. He also attacked Karna, the son of a charioteer, with twelve arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)