Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.88.10-11h: रणभूमि में वे दोनों वीर शत्रुओं के लिए उसी प्रकार कष्ट भोग रहे थे, जैसे प्रलय के दो सूर्य, जो जगत् को दहला देने की इच्छा से प्रकट हुए थे। कर्ण और अर्जुन रूपी दोनों सूर्य अपने विशाल धनुषाकार चक्रों के मध्य में चमक रहे थे। सहस्रों बाण उनकी किरणें थीं और वे दोनों महान तेज से परिपूर्ण प्रतीत हो रहे थे। 10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रणभूमि में वे दोनों वीर शत्रुओं के लिए उसी प्रकार कष्ट भोग रहे थे, जैसे प्रलय के दो सूर्य, जो जगत् को दहला देने की इच्छा से प्रकट हुए थे। कर्ण और अर्जुन रूपी दोनों सूर्य अपने विशाल धनुषाकार चक्रों के मध्य में चमक रहे थे। सहस्रों बाण उनकी किरणें थीं और वे दोनों महान तेज से परिपूर्ण प्रतीत हो रहे थे। 10 1/2॥
In the battlefield, both those brave souls were suffering for the enemies like the two suns of the doomsday that had appeared with the desire to set the world on fire. Both the suns in the form of Karna and Arjuna were shining in the middle of their huge bow-like circles. Thousands of arrows were their rays and both of them appeared to be full of great brilliance. 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥