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श्लोक 8.87.d11  |
विमानानि विचित्राणि गुणवन्ति च सर्वश:।
समारुह्य समाजग्मुर्द्वैरथं कर्णपार्थयो:॥ ) |
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| अनुवाद |
| वे सभी विचित्र और सुन्दर विमानों पर बैठकर कर्ण और अर्जुन का द्वन्द्वयुद्ध देखने आये थे। |
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| All of them had come to watch the duel between Karna and Arjun, sitting on strange and beautiful planes. |
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