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श्लोक 8.87.92  |
तयोर्ध्वजौ वीतमलौ शुशुभाते रथे स्थितौ।
राहुकेतू यथाऽऽकाशे उदितौ जगत: क्षये॥ ९२॥ |
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| अनुवाद |
| उनके रथों पर स्वच्छ ध्वजाएँ ऐसी शोभा पा रही थीं मानो संसार के प्रलयकाल में राहु-केतु ग्रह आकाश में प्रकट हो गए हों ॥92॥ |
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| Clean flags adorned their chariots as if the planets Rahu and Ketu had appeared in the sky at the time of the world's doomsday. ॥92॥ |
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