श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 68-70h
 
 
श्लोक  8.87.68-70h 
ब्रह्मेशानावथो वाक्यमूचतुस्त्रिदशेश्वरम्॥ ६८॥
विजयो ध्रुवमेवास्य विजयस्य महात्मन:।
खाण्डवे येन हुतभुक्तोषित: सव्यसाचिना॥ ६९॥
स्वर्गं च समनुप्राप्य साहाय्यं शक्र ते कृतम्।
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्मा और महादेवजी ने देवेश्वर इन्द्र से कहा - 'महात्मा अर्जुन की विजय निश्चित है। इन्द्र! यह शुभचिंतक अर्जुन खाण्डववन में अग्निदेव को संतुष्ट करके स्वर्गलोक में गया और आपकी भी सहायता की। 68-69 1/2॥
 
Then Brahma and Mahadevji said to Deveshwar Indra – 'Mahatma Arjun's victory is certain. Indra! This well-meaning Arjuna satisfied Agnidev in Khandavavan and went to heaven and helped you too. 68-69 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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