श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  8.87.40-41h 
असुरा यातुधानाश्च गुह्यकाश्च परंतप॥ ४०॥
ते कर्णं समपद्यन्त हृष्टरूपा: समन्तत:।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को परास्त करने वाले वीर! असुर, यातुधान और गुह्यक- ये सभी प्रसन्न होकर कर्ण के पक्ष में आ गए ॥40 1/2॥
 
Brave who defeats his enemies! Asura, Yatudhaan and Guhyak - all of them became happy and came to Karna's side. 40 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)