श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  8.87.37-38h 
व्यश्रूयन्त मिथो भिन्ना: सर्वलोकास्तु मारिष।
देवदानवगन्धर्वा: पिशाचोरगराक्षसा:॥ ३७॥
प्रतिपक्षग्रहं चक्रु: कर्णार्जुनसमागमे।
 
 
अनुवाद
श्रीमान् ! सभी लोग भिन्न-भिन्न विचार व्यक्त करते हुए सुनाई दे रहे थे। देवता, दानव, गन्धर्व, पिशाच, नाग और राक्षस - सभी कर्ण और अर्जुन के युद्ध के विषय में पक्ष-विपक्ष में थे । 37 1/2॥
 
Sir! Everyone was heard expressing different views. Gods, demons, Gandharvas, vampires, snakes and demons – all of them took sides and opposition regarding the war between Karna and Arjun. 37 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)