श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 101-102
 
 
श्लोक  8.87.101-102 
कर्णं चाप्यजयद् दृष्टॺा कुन्तीपुत्रो धनंजय:।
अथाब्रवीत् सूतपुत्र: शल्यमाभाष्य सस्मितम्॥ १०१॥
यदि पार्थो रणे हन्यादद्य मामिह कर्हिचित्।
किं करिष्यसि संग्रामे शल्य सत्यमथोच्यताम्॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार कुन्तीनन्दन धनञ्जय ने भी अपनी दूरदर्शिता से कर्ण को परास्त कर दिया। तत्पश्चात् कर्ण ने हँसकर शल्य से कहा - 'शल्य! सच-सच बताओ, यदि आज रणभूमि में कुन्तीपुत्र अर्जुन मुझे मार डालें, तो इस युद्ध में तुम क्या करोगे?' 101-102॥
 
Similarly, Kuntinandan Dhananjaya also defeated Karna with his vision. Thereafter, Karna said to Shalya with a smile – 'Shalya! Tell me the truth, if Kunti's son Arjuna kills me today in the battlefield, what will you do in this battle?' 101-102॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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