अथाब्रवीन्मारुति: फाल्गुनं च
पश्यस्वैनं नकुलं पीडॺमानम्।
अयं च नो बाधते कर्णपुत्र-
स्तस्माद् भवान् प्रत्युपयातु कार्णिम्॥ ४०॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वायुपुत्र भीमसेन ने अर्जुन से कहा - 'देखो, यह नकुल वृषसेन से पीड़ित हो गया है। यह कर्णपुत्र हमें बहुत कष्ट दे रहा है, अतः तुम इस कर्णपुत्र पर आक्रमण करो।'
Thereafter Vayu's son Bhimasena said to Arjuna - 'Look, this Nakul has been afflicted by Vrishasena. This son of Karna is troubling us a lot, so you attack this son of Karna.'