श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 84: धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना तथा नकुल और वृषसेनका युद्ध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  8.84.40 
अथाब्रवीन्मारुति: फाल्गुनं च
पश्यस्वैनं नकुलं पीडॺमानम्।
अयं च नो बाधते कर्णपुत्र-
स्तस्माद् भवान् प्रत्युपयातु कार्णिम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वायुपुत्र भीमसेन ने अर्जुन से कहा - 'देखो, यह नकुल वृषसेन से पीड़ित हो गया है। यह कर्णपुत्र हमें बहुत कष्ट दे रहा है, अतः तुम इस कर्णपुत्र पर आक्रमण करो।'
 
Thereafter Vayu's son Bhimasena said to Arjuna - 'Look, this Nakul has been afflicted by Vrishasena. This son of Karna is troubling us a lot, so you attack this son of Karna.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas